खौफनाक रात के बाद की सुबह उम्मीद से कहीं ज़्यादा उजली थी। रात भर की मूसलाधार बारिश ने हवा को बिल्कुल साफ़ कर दिया था। जब शिवांशी की आँख खुली, तो सूरज की किरणें खिड़की के काँच से छनकर उसके चेहरे पर पड़ रही थीं। कल रात का वह खौफ, वह विशाल परछाईं और साँप—दिन के उजाले में सब कुछ किसी धुंधली याद जैसा लग रहा था। शिवांशी ने एक गहरी साँस ली। वह महादेव की अनन्य भक्त थी, और उसका अटूट विश्वास था कि जहाँ शिव का वास है, वहाँ अमंगल नहीं हो सकता। फिर भी, वह सपना और वे