राहें - 20

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अहंकारहवा के तेज झोंके उसकी साडी के आंचल और बालों को बिखेररहे थे, बार बार वह साड़ी का आंचल सम्हालती, गाड़ी के डब्बे मेंआने जाने वाले यात्रियों व उनकी गतिविधियों से बेखबर- वह ट्रेनमें बैठी खिड़की से बाहर के आते जाते दृश्यों को देखती जा रही थी,परन्तु मन कहीं और पिछली बातों में खोया हुआ था। अनिश्चितभविष्य, अनिश्चित गंतव्य उसके मन को बार बार भावुक बना देते थे।भविष्य की चिंता व भय उसके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई दे रहे थे . ट्रेनकी गति से भी तीव्र गति से उसका मन दौड़ रहा था। अनेकआशकांयें उसे परेशान कर रही थी, चिंताएं उसके