एक दिन दिव्यम चित्रा को स्कूटी चलाना सिखा रहा था। चित्रा अभी भी पूरी तरह आत्मविश्वास से स्कूटी नहीं चला पाती थी, इसलिए दिव्यम उसके साथ-साथ चल रहा था और बार-बार उसे समझा रहा था—“धीरे चलाओ चित्रा... घबराने की जरूरत नहीं है। ब्रेक तुम्हारे हाथ में है।”चित्रा मुस्कुराते हुए बोली,“आपको तो बहुत आसान लगता है... चलाना मुझे पड़ रहा है।”दिव्यम हँस पड़ा।“कुछ दिनों में तुम खुद मुझे पीछे छोड़कर निकल जाओगी।”दोनों की यह हल्की-सी बातचीत सड़क से गुजर रहे एक आदमी ने देख ली।वह चित्रा का पहला पति था।उसके साथ उसका दोस्त भी था।दोस्त की नजर अचानक चित्रा पर पड़ी।“अरे...