अन्तर्निहित - 55

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[55] रात्री निवास हेतु मार्ग में पड़े गाँव में दोनों ने प्रवेश किया। किसी सज्जन के घर दोनों को आश्रय मिला। भोजन पूर्ण होते ही सज्जन ने कहा, “आज गाँव में माता के भजन का कार्यक्रम है। साधुओं की एक टोली आई है। क्या आप चलोगे भजन कीर्तन में?”शैल ने कहा, “सारा जी चलेंगे क्या?”“जी अवश्य चलेंगे।” “किन्तु आप वहाँ नहीं आ सकती। केवल शैल ही चल सकता है।”“क्यों? क्या स्त्रीयां वहाँ नहीं जाती है?” “स्त्रीयां भी जाती है किन्तु आप नहीं जा सकती। क्यों कि ...।”“मैं मुस्लिम स्त्री हूँ इसलिए न?”“वहाँ विधर्मियों का आना निषेध है।”“ठीक है, शैल। तुम जाकर आओ। मैं