MTNL की घंटी - 35

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85 साल के बुजुर्ग बाबा पिछले तीन महीनों से अस्पताल के कमरे में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। उम्र ने तो उन्हें झुका ही दिया था, लेकिन असली जंग उनके शरीर के अंग लड़ रहे थे। किडनी पूरी तरह से जवाब दे चुकी थी, लिवर भी लगभग काम करना बंद कर चुका था और दिल किसी भी क्षण धड़कना छोड़ सकता था। लेकिन उनके चेहरे पर हमेशा एक हल्की सी मुस्कान रहती थी। हर नर्स, हर अटेंडेंट उन्हें देख कर हैरान रह जाता था कि इतनी बीमारी और दर्द के बावजूद ये इंसान इतना जिंदादिल कैसे रह