अनजानी भाषाभाषाएँ केवल शब्दों से नहीं बनतीं। कुछ भाषाएँ आँखों में बसती हैं, कुछ मौन में, और कुछ सीधे आत्मा तक पहुँच जाती हैं।राघव एक प्रसिद्ध भाषाविद् था। उसने संसार की पचास से अधिक भाषाएँ सीख रखी थीं। संस्कृत, फ़ारसी, अरबी, ग्रीक, लैटिन, तिब्बती, चीनी—शायद ही कोई भाषा हो जिसे वह पढ़ न सकता हो। लोग कहते थे, "यदि दुनिया में कोई भाषा है, तो राघव उसे समझ सकता है."लेकिन राघव हमेशा मुस्कुरा देता और कहता, "अभी बहुत कुछ बाकी है."एक दिन उसे हिमालय की तलहटी में बसे एक छोटे से गाँव के बारे में पता चला। कहा जाता था