ठुकराईन नयना देवी - 3

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उम्र के तीसरे पड़ाव पर आकर नयनादेवी बिल्कुल शांत हो गई थीं। तीनों बच्चों की शादी के बाद घर खाली-खाली सा हो गया था। दोनों लड़के विदेश जाकर बस गए थे, और बेटी अपनी ससुराल चली गई थी। बड़े शहर का बंगला अब उन्हें काटने को दौड़ता था।एक दिन नयनादेवी महाकाल दर्शन करने उज्जैन गईं। वहां से लौटकर उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। उन्होंने अपना शहर का बड़ा सा बंगला बेच दिया और गांव के छोटे से घर में रहने लगीं। बंगला बेचकर जो पैसे मिले, उनसे उन्होंने गांव में एक छोटा अस्पताल बनवा दिया। उस अस्पताल में सिर्फ