आपकी शैली के अनुरूप एक प्रेरणादायक, कल्पनाशील और भावनात्मक कहानी प्रस्तुत है।चाँद पर जीवन। लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसर। जब भी रात के आकाश में चाँद चमकता, बारह वर्षीय आरव घंटों उसे निहारता रहता. गाँव के लोग कहते, "चाँद पर कोई नहीं रहता." लेकिन आरव मुस्कुराकर कहता, "एक दिन मैं खुद जाकर देखूँगा."लोग उसकी बात पर हँस देते. कोई उसे पागल कहता, कोई सपनों में खोया हुआ लड़का. पर उसकी माँ हमेशा कहती, "जिस सपने पर दुनिया हँसे, वही सपना इतिहास बनाता है."आरव का परिवार बहुत साधारण था. पिता किसान थे और घर की आर्थिक स्थिति