​बिन माँ की रसोई

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घर में मेहमानों का ताँता लगा हुआ था और रसोई की पूरी कमान पड़ोस की ताईजी के हाथों में थी, क्योंकि माँ किसी पारिवारिक रिश्तेदार की शादी में शहर से बाहर गई हुई थीं। ताईजी ने मेहमानों की आवभगत के लिए बड़े चाव और मेहनत से शाही आलू-गोभी की लजीज सब्जी और तंदूर जैसी फूली हुई गर्मागर्म रोटियाँ तैयार की थीं। घर के डाइनिंग हॉल में मेहमानों की चहल-पहल परवान पर थी और उस स्वादिष्ट खाने की सोंधी-सोंधी खुशबू पूरे घर में महक रही थी। सब लोग अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठकर खाने का आनंद लेने के लिए तैयार थे।आर्यन ने