मोबाइल की लतमोहन पुणे में एक अच्छी कंपनी में जॉब करता था। उसकी पत्नी नेहा भी वर्किंग थी। इसी वजह से दोनों अपने 12 वर्षीय बेटे रोहन को घर पर अकेला छोड़कर चले जाते थे। स्कूल से आते ही रोहन का दिन मोबाइल से शुरू होता और उसी पर खत्म। सारा दिन, रात सोने तक वो गेम खेलता रहता। धीरे-धीरे पढ़ाई में वो बहुत पीछे चला गया। जब भी नेहा उसे पढ़ने के लिए कहती, तो वो या तो अनसुना कर देता या गुस्से में जवाब देने लगता। नेहा रोहन की इस आदत से बहुत परेशान थी। उसे लगता था नौकरी