वो लड़की जो कभी - Chapter 4-5

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अध्याय 4 — पहला इंकाररुहिका ने अपनी पहली कहानी पूरी की तो उसे लगा जैसे उसने अपने दिल का एक हिस्सा कागज़ पर रख दिया हो।कहानी का नाम था—"बारिश के बाद की धूप"।उसने कई बार उसे पढ़ा। हर बार कोई शब्द बदलती, कोई वाक्य मिटाती, फिर लिखती। उसे लगता था कि यह कहानी सिर्फ़ कहानी नहीं, उसकी साँसों का हिस्सा है।आख़िरकार उसने वह कहानी एक प्रसिद्ध पत्रिका में भेज दी।इसके बाद हर सुबह उसकी शुरुआत एक ही उम्मीद से होती—शायद आज जवाब आएगा।दिन बीतते गए।एक सप्ताह…दो सप्ताह…फिर एक महीना।एक दोपहर डाकिया घर के बाहर रुका। उसके हाथ में एक लिफ़ाफ़ा