सजा.....बिना कसूर की - 8

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और अब ... विदाई की घड़ीयह वो समां होता है जिसमें खुशी भी होती है और दुख भी। हर आंख नम हो जाती है जब बेटी विदा होती है ‌।ये वह पल है जिसे मैं अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकती ना इसे समझ सकती हूं और ना ही समझा सकती हूं ।ये तो वही समझ सकता है  या समझा सकता है जिसने अपनी बेटी विदा की है।जिसने पाल पोस कर अपनी बेटी को बड़ा किया और अपने दिल के टुकड़े को किसी और को सौंप दिया हो। आज भूमि के माता-पिता की भी वही दसा थी।बेटी को विदा  करने की खुशी और