इंसान अपने मुताबिक़ रंग चुनता हैउसे लगता है की वो रंग चुनने माहिर हैजैसे...वह अपनी खुशी दर्शाने के लिएकभी लाल चुनता है,कभी सफेद याकभी काला।ग़म की तस्वीर मेंकभी काले रंग भरता है,तो कभी हरे या;फिर वही सफेद।पर सच तो ये है—रंग इंसान नहीं चुनता,रंग तो ऊपर वाला रंगता है रंगरेज़ जो है वो....उसके हाथ में है ब्रश, रंग हैवो अपनी मर्ज़ी से रंग भरता हैं जीवन के कैनवस पर।हम तो बस उसके बनाए चित्र कोकभी समझ नहीं पाते,और रंगों से ही नाराज़ हो जाते हैं।देव जी......आपने सारे प्रश्नों के उत्तर ग़लत दिए थे।आसमान नीला नहीं होता —वो तो सफेद होता है।बस, ऊपर