पॉकेट में जितना ज्यादा माल, घरवाली के उतने ज्यादा गुलाबी गाल

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### **पॉकेट में जितना ज्यादा माल, घरवाली के उतने ज्यादा गुलाबी गाल** संडे की अलसायी सुबह थी। आर्यन बेड पर लेटा हुआ सीलिंग फैन के घूमते ब्लेड्स को घूर रहा था, लेकिन उसके कानों में ड्रॉइंग रूम से आती खिलखिलाहटें और चाय के कपों की खनक साफ़ गूँज रही थी। पिछले दो घंटे से घर में फूफा जी और एक दूर की मौसी डेरा डाले हुए थे।मम्मी अचानक कमरे में दाखिल हुईं, उनके हाथ में एक रंगीन वॉटसऐप प्रिंटアウト था। उन्होंने आर्यन के सीने पर वो कागज़ टिकाते हुए कहा, "आर्यन, ज़रा देखना। शर्मा जी की बेटी है। बैंक मेंअगर आपको और भी दिलचस्प कहानियाँ पढ़नी या सुननी हैं, तो हमारी कहानी पॉकेट एफएम पर चल रही है—**'हिडन डील तलाश एक वारिस की'**।