यादों की पोटली

वो दिन भी क्या दिन थे  जानकी देवी की लड़की की शादी थी आज। घर फिर भी सूना लग रहा था। कोई रिश्तेदार नहीं आया था। जो आस-पड़ोस के जान-पहचान वाले थे वो भी रात को ही आयेंगे सिर्फ खाना खाने। जानकी के घमंडी स्वभाव के कारण किसी से न बनती थी, क्योंकि जानकी रिश्तों से ज्यादा पैसों को महत्व देती थी। हर बात पर उसकी जबां पर पैसा आ ही जाता। उसके इसी दिखावे की आदत के कारण सभी रिश्तेदारों ने उससे बात करना बंद कर दिया। आज उसकी बेटी की शादी में कोई नहीं आया।  जानकी ने संकोच करते हुए