Devil की दास्तान - 31

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हवेली की दीवारें हिल रही हैं। टुकड़े-टुकड़े काँच फर्श पर बिखरे हैं। बिजली की चमक में दो परछाइयाँ नज़र आ रही हैं — करण और रूद्र की।)“वो सिर्फ़ दो जिस्मों की लड़ाई नहीं थी...वो दो आत्माओं का हिसाब था — दोस्ती, धोखे और खून का।”(सिमरन कोने में खड़ी है। उसकी आँखें भय से चौड़ी हैं। करण और रूद्र हवा में टकराते हैं, आवाज़ गूँजती है। बीच-बीच में उनके शब्द सुनाई देते हैं।)रूद्र (गुस्से में) बोला - “याद है करण? पाँच साल पहले... जब हम पहली बार इंसानी खून पीने पृथ्वी पर आए थे?”(करण की आँखों में झिलमिलाती यादें उभरने लगती हैं।