तीज का सिंधारा

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आज तनु अपनी दोस्त प्रीति से मिलने उसके घर गई थी। बहुत दिनों बाद दोनों दोस्त मिलीं थीं। एक दूसरे को देख दोनों खुशी से चहकते हुए गले मिली। प्रीति अपना घर दिखाने लगी तनु को। अपने बेडरूम में पहुंचकर प्रीति अपना सामान दिखाने लगी जो उसके मायके से आया था हरियाली तीज पर। कही कहीं इस भेंट उपहार को सिंधारा भी कहते हैं। तनु को सब बहुत बढ़िया लगा। थोड़ी देर बाद तनु अपने घर लौट आई।शाम का समय था। पक्षी अपने घर लौट रहे। आकाश में काले बादल छाए हुए थे। लेकिन बरस नहीं रहे थे। जैसी उमस