दंगा

  • 926
  • 357

एक नगर में जाने किस बात पर दंगा भड़का कि दंगाई खून की होली खेलने लगे। वहां देखते-ही-देखते रक्तरंजित लाशें बिछ गईं। जबरदस्त आगजनी हुई। घर-के-घर फूंक डाले गए। मोटरगाड़ियां धू-धू कर जल उठीं। लाठियां भांजी गई। तलवारें लहराए गए। जमकर पत्थरबाजियां हुई।   प्रशासन ने बेकाबू दंगे को काबू में करने के लिए कर्फ्यू लगा दिया और पूरी ताकत से दबा दिया। कहीं गोली चलाया, कहीं लाठी-डंडे बरसाया, तो कहीं अश्रुगैस के गोले छोड़ दिया।   दंगा शांत होने के बाद एक अर्द्ध विक्षिप्त व्यक्ति नगर घूमने के लिए निकला। वह यह देखकर दंग रह गया कि आज यहां