[49]“दो दिन पूर्व मेरे कार्यालय में सपन और निहारिका के साथ कपिल महोदय भी आए थे। उन्होंने मुझे उनकी इच्छानुसार, वत्सर को दोषी सिद्ध करे ऐसे परिणामों को बनाने को कहा था। मैंने वैसे ही परिणाम बनाए, उन्हें दिखाए भी। पढ़कर वे तीनों संतुष्ट हो गए। तब मैंने उस पर हस्ताक्षर कर, आवरण में बंद कर उस पर हमारी मुद्रा अंकित कर दी। तीनों कार्यालय से विदा हो गए। ऐसा करने के लिए उन्होंने मुझे तथा मेरे साथियों को लोभ – लालच भी दिया। किन्तु मैंने और विकास ने वास्तविक परिणाम ही न्यायालय में प्रस्तुत किए। सभी परीक्षणों का जीवंत