बहते आँसू

बहते आँसूएक भावपूर्ण हिंदी कहानीलेखक: विजय शर्मा ऐरीगौरव खिड़की के पास बैठा बाहर गिरती बारिश को देख रहा था। उसकी आँखों से भी आँसू उसी बारिश की तरह लगातार बह रहे थे। कभी-कभी इंसान के जीवन में ऐसे तूफान आते हैं जो बाहर नहीं, भीतर सब कुछ उजाड़ देते हैं।गौरव एक साधारण परिवार का लड़का था। पिता स्कूल में अध्यापक थे और माँ गृहिणी। परिवार अमीर नहीं था, लेकिन प्यार और संस्कारों से भरपूर था। माँ अक्सर कहा करती थीं—"बेटा, जिंदगी में चाहे कितना भी बड़ा आदमी बन जाना, लेकिन इंसानियत कभी मत छोड़ना।"गौरव मुस्कुराकर कहता—"माँ, आपका बेटा कभी आपको