आशिकी.....अब तुम ही हो। - 12

अध्याय: 12दृश्य: सनाया का घर,आशुतोष तेज कदमों से सीढ़ियां चढ़ते हुए सनाया के कमरे के सामने पहुंचता है। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था ।आशुतोष:(कमरे के दरवाजे के सामने खड़े होकर) सनाया,(अंदर से कोई जवाब नही आता )आशुतोष: (दरवाजा खटखटाते हुए) Open the door, princess।कमरे के अंदर , गुस्से में इधर उधर टहल रही सनाया कुछ पल  वहीं खड़ी रहती है, फिर तेजी से बढ़कर दरवाजा खोलती है। और बिना कुछ  कहे  वापस जाकर बेड  पर बैठ जाती है।आशुतोष कमरे के अंदर आया,....कमरे की हालत पूरी बिगड़ चुकी थी। चारों तरफ सामान बिखरा पड़ा था , फर्श पर टूटे