50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 29

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(जेल के बाहर जमा हुई भीड़ की दहाड़, जो 'आर्यन को रिहा करो' के नारे लगा रही है। विक्रम मल्होत्रा के बंगले के अंदर कांच के टूटने की आवाज़ और अफरा-तफरी का शोर। आर्यन की कालकोठरी में शांति है, लेकिन उसकी आँखों में अब एक ऐसी आग है जो कंक्रीट को भी पिघला सकती है।)आर्यन अपनी कोठरी में बैठा अपनी नोटबुक के पन्ने पलट रहा था। 16 दिन शेष। उसने पन्ने पर लिखा: "सन्नाटा टूटने का शोर सबसे ज़्यादा बहरा कर देने वाला होता है।" वह जानता था कि उसके पिता अब किसी भी हद तक गिर सकते हैं।सीन 1: