Devil की दास्तान - 19

(काली रात... जंगल के पेड़ों से हवा टकरा रही है। झींगुरों की आवाज़ गूँज रही है।सिमरन करण को किसी तरह एक पुराने पेड़ के नीचे ले आती है।करण घायल है, उसकी साँसें टूटी-टूटी सी चल रही हैं।)सिमरन (रोते हुए) बोली - “करण जी... आ आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे?... मेरी तरफ देखिए। ... आपके ज़ख्म... इतना खून...। हेभगवान...मैं क्या करूं?”(वो काँपते हाथों से करण का चेहरा थामती है। करण की आँखें बंद हैं, होंठ सूखे हुए हैं।)सिमरन (घबराकर) बोली - “मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा... मैं क्या करूँ?...भगवान! कोई तो रास्ता दिखा दो...”(वो इधर-उधर भागती है, पत्ते तोड़ती है, झील