गीत गाने दो मुझे - 3

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अंक तीन (निराला का वही घर । ओसारा जर्जर हो चुका है। तख्ते पर रजाई बिछी है। तकिए की जगह ईट रखी है। दीवाल के निकट ही पानी से भरा घड़ा रखा है। घड़ा एक कुल्हड़ से ढका है। दीवाल के सहारे पक्षियों की मिट्ठी की मूर्तियाँ टँगी हैं तथा खूंटी पर कुर्ता। धीरे - धीरे मंच पर प्रकाश बढ़ता है। दाएँ से नट एवं बाएँ से नटी प्रवेश करती है।)नट- जिस पौरुश ने लीक दिखाई लोक दिखाया,नटी- वह माटी की मूरत कैसे बन सकता था।नट- जो उतरा था बनकर मशाल इस धरती पर,नटी- कैसे वह फागुन को सावन कह