एपिसोड – “शक की दीवार”शादी से लौटने के बाद…घर में सब कुछ सामान्य दिख रहा था।लेकिन…अंदर बहुत कुछ बदल चुका था। ज़हर की शुरुआतअगले ही दिन…दिव्यम के घर के बाहरएक औरत आई—वो पड़ोस में रहने वाली थी…और चित्र के पहले पति की रिश्तेदार।दादी ने उसे अंदर बुलाया।“आओ बहन, कैसे आना हुआ?”वो बैठते ही बोली—“बस ऐसे ही… सोचा मिलने आ जाऊँ…”लेकिन उसकी नज़रें इधर-उधर घूम रही थीं।फिर धीरे से बोली—“आपकी नई बहू… चित्र है ना?”दादी बोली—“हाँ, वही है…” ज़हर भरे शब्दउस औरत ने लंबी साँस ली—“आपको पता है… वो पहले कैसी थी?”दादी चौकन्नी हो गई—“क्या मतलब?”वो औरत और पास झुककर