भाग 3अवनि ने कांपते हाथों से घर का दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से कदमों की आवाज़ आई और दरवाज़ा खुला।सामने उसकी माँ खड़ी थीं। वे देख नहीं सकती थीं, इसलिए वो हर चीज़ महसूस करके समझ जाती थीं। वो चुपचाप खड़ी रहीं, जैसे अवनि के कुछ बोलने का इंतज़ार कर रही हों। अवनि के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था, और माथे पर पसीना था। .माँ ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अवनि का दाहिना हाथ पकड़ लिया।"आ गई मेरी बच्ची?" माँ ने प्यार से पूछा। अवनि एकदम से डर गई। उसके उसी हाथ पर खून के सूखे हुए छोटे-छोटे दाग थे।