अन्तर्निहित - 45

[45]“कपिल महोदय, और कोई तर्क है क्या?” या इस बात को यहाँ सम्पन्न मानकर स्वीकार कर लें कि राधाजी का कोई साकार अस्तित्व नहीं था?”कपिल निरुत्तर रहा। “यदि अन्य कोई इस विषय में अपना पक्ष रखना चाहता हो तो उसका स्वागत है।” न्यायाधीश के इस आह्वान पर उपस्थित जनसमूह में बातें होने लगी। कोई पक्ष रखने के लिए प्रस्तुत नहीं हुआ। “तो यह मान लिया जाता है कि इस विषय में अब किसी को कुछ नहीं कहना।”“मैं कुछ कहना चाहती हूँ।” स्वयं न्यायाधीश की पत्नी ने कहा। उसकी तरफ देखकर न्यायाधीश भूपेन्द्र ने कहा, “वत्सर। यह स्त्री मेरी पत्नी भद्रा है। इस