Devil की दास्तान - 10

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(ऑफिस का रात का माहौल। सभी लोग जा चुके हैं। सिर्फ़ करण अपनी केबिन में बैठा है। सिमरन फ़ाइल लेकर धीरे-धीरे दरवाज़ा खटखटाती है।)Simran (धीमे स्वर में, घबराई हुई) बोली - "स…सर, ये साइन चाहिए थे…"(करण धीरे से सिर उठाता है। उसकी लाल आँखों में हल्की चमक है। सिमरन की नाक से अभी भी हल्की चोट का निशान है। करण की प्यास और बढ़ जाती है।)Karan (आँखें गहरी करते हुए) बोला - "इतनी देर रात… तुम अकेली क्यों रुकी हो?"(सिमरन घबराकर झुक जाती है। उसके हाथ काँप रहे हैं।)Simran (धीरे से) बोली - "वो… आपका ऑर्डर था सर… मैं डरी हुई थी, इसलिए…"(करण