निलु की बात सुनकर कुंम्भन गरजते हूए कहता है। हे मुर्ख मानव । कदाचित मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है के तुम मेरे वस्त्र की बात कर रहे हो। निलु बिड़ी का एक गहरी कस्त लगाकर कहती है। कदाचित , प्रतीत ! हे भगवान ये किस आदी मानव से पाला पड़ गया आज मेरा । इसकी आधी भाषा मुझे वैसे ही समझ मे नही आ रही है। लगता है नाटक कंपनी मे एक ही केरेक्टर का रोल प्ले कर करके इसका इसका भाषा भी वैसी ही हो गई है। कुंभ्मन निलु से कहता है। देखो मानव मैं अंतिम बार चेतावनी दे रहा हूँ । इतनी