शादी का माहौल फिर से सामान्य हो चुका था।नीतू ने अपनी बात को ऐसे पलटा कि किसी को शक ही नहीं हुआ।“अरे मैं क्यों गिराऊँगी चित्र को… मैं तो उसे संभाल रही थी!”लोगों ने भी बात वहीं खत्म कर दी।लेकिन…कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। एक नजर… जिसने सब बदल दियाभीड़ के बीच…खाने के स्टॉल के पास…एक चेहरा खड़ा था।चित्र का पहला पति।वो अपने दोस्त के साथ खाना खा रहा था…लेकिन जैसे ही उसकी नजर चित्र पर पड़ी—उसके हाथ रुक गए।“ये… चित्र?”उसकी आँखें फैल गईं। पहचान और चुभनउसका दोस्त बोला—“किसे देख रहे हो?”वो धीरे से बोला—“वो… लड़की…”दोस्त ने देखा और