महक चुपचाप सब सुन रही थी...तभी ताया जी की आवाज़ टूटी — भारी, थकी हुई, जैसे वर्षों का बोझ अचानक ज़ुबान पर आ गया हो..."महक बेटा... ज़िंदगी में एक बहुत बड़ी गलती कर दी मैंने... बहुत बड़ी...""नहीं ताया जी, आप कोई गलती नहीं कर सकते," महक ने जल्दी से कहा, जैसे किसी टूटते हुए विश्वास को थाम लेना चाहती हो।ताया जी की आँखें कहीं दूर अतीत में जा टिकीं।"एक दिन मैंने सोनिया को मिलने बुलाया... बस उसे समझाने के लिए... लेकिन उसे मेरी दखलअंदाज़ी पसंद नहीं आई। बात बढ़ी... वो मुझ पर हाथ उठाने ही वाली थी, कि चिंटू ने