व्यक्ति कब कैसे इतना इतना स्वार्थी बन जाता है पता ही नहीं चलता।पर ये उस व्यक्ति की गलती नहीं है उसकी अपनी परिस्थितियों इतना स्वार्थी बना देती है।वो पहले हमें बहुत अच्छा लगता है।आप जो उस बारे में अभी जो सोच रहे हो वैसा कभी उसके प्रति आपके दिमाक में भी आया होगा क्योंकि वो पीले ऐसा था ही नहीं। फिर व्यक्ति के जीवन में ऐसे छोटे छोटे बदलाव आने लगते मतलब उसके जीवन में इसी इसी परिस्थितिया सामने आ खड़ी हो जाती है कि उसे बदलना ही पड़ता है।हा एक बात ओर कि वो अपने प्रत्येक बदलाव से पहले