थकान और कमजोरी से लड़की की आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममता भी पूरी हो जाए… वो भी माँ बन जाये…”धीरे-धीरे वह गहरी नींद में चली गई।शाम ढलते ही जब आँख खुली, तो सामने का दृश्य देख कर उसका दिल भर आया—केशव बच्चे को अपने सीने से लगाकर कुर्सी पर ही सो गया था।उसके चेहरे पर अजीब-सी शांति थी, और नन्हा-सा शिशु उसकी बाँहों में सुरक्षित महसूस कर रहा था।लड़की ने चुपके से केशव को देखा।