देवकी का आशीर्वाद

चिन्मयी देवी ने गहनों का डिब्बा बहुत धीरे-धीरे खोला। एक-एक करके उन्होंने गले का हार, कानों के झुमके, माथे का टीका और नाक की नथ निकाली। सबसे अंत में उन्होंने एक जोड़ी चूड़ियाँ निकालीं। उनकी आँखों में आँसू भर आए। कल प्रभा की शादी है। इन सब गहनों से उसे सजा दिया जाएगा, लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा चमकेंगी यही चूड़ियाँ।अचानक कंधे पर किसी के हाथ का स्पर्श पाकर वह चौंक उठीं। पीछे मुड़कर देखा तो रजत बाबू चुपचाप उनके पीछे आकर खड़े थे। वह जल्दी से आँसू पोंछ ही रही थीं कि रजत बाबू बोले, “डर लग रहा