वह पुराना बंगलामल्हार एक फ्रीलांस फोटोग्राफर था, जिसे पुरानी इमारतों और सन्नाटों को कैमरे में कैद करने का जुनून था। इसी जुनून के चलते वह हिमाचल के एक दूरदराज गाँव 'अंधेरी घाटी' पहुँचा। वहां एक पुरानी हवेली थी जिसके बारे में मशहूर था कि वह "सायों का बसेरा" है।गाँव वालों ने उसे चेतावनी दी थी:"बेटा, सूरज ढलने के बाद उस हवेली की दीवारों पर अपनी परछाईं मत देखना। वहां परछाइयाँ शरीर से अलग होकर चलने लगती हैं।"मल्हार इन बातों को अंधविश्वास मानता था। उसने हवेली के भारी लकड़ी के दरवाजे को धक्का दिया। चरमराती हुई आवाज के साथ दरवाजा खुला