ममता ...एक अनुभूति... - 4

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लड़की ने बोलना जारी रखा...राज ठाकुर की पत्नी सुनीता ने अचानक मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया और मुझे भीतर ले गई।उसकी मुस्कान में एक अजीब-सी दृढ़ता थी, जैसे सब कुछ पहले से तय हो।मेरे पेट पर हाथ फेरते हुए उसने कहा—“यह सिर्फ़ बच्चा नहीं... यह इस घर का भविष्य है।मेरे राज का अंश... वह वारिस, जिसके लिए मैंने वर्षों तक पूजा-पाठ किए, व्रत रखे...अब मेरी ममता अधूरी नहीं रहेगी।”मेरे भीतर घबराहट की लहर दौड़ गई।ये कैसी ममता? ये कैसी ख़ुशी?राज ठाकुर की आँखों में भी अजीब चमक थी।वह सुनीता के साथ खड़े होकर बोला—“आज से तुम इसी घर में रहोगी।तुम्हारा