सजा.....बिना कसूर की

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प्रिया पाठको,,यह एक  सामाजिक कहानी है ।जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है ।अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा .......        ........        ..........           ..........             ..........आकाश ...अब चलो भी और कितना टाइम लगाओगे तैयार होने में  , कहते हुए मीरा आकाश के कमरे में प्रवेश करती है।बस तैयार हो  ही रहा हूं भाभी,, और मैंनै कितनी बार कहा है भाभी की मेरे कमरे में दरवाजा नौक करके आया करो।अच्छा बेटा अब तुम्हारे कमरे में नौक करके‌ आऊं भूल गए जब