विचार

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मेरे विचार बड़े अजीब से है ना, न इनमें कोई तुक है न ताव यानि सारे विचार बास की तरह खोखले है।नहीं ऐसा तो नहीं हो सकता ऐसा होता तो मैं इन विचारों पे लिख ही नहीं पाता। हां शायद लिख लेता हु पर लिखावट में कहा मेल मिलाप,मिलाप का आप जानो मेल तो मेरे फोन में है।अब पक्का हो गया मेरे विचार भी बास की तरह खोखले है।विचारों के इस महाभण्डार में सही ओर अच्छे मजबूत विचार चुनना ही बड़े विचार की बात है।हर एक इंसान के मस्तिष्क में विचार आते रहते है। हर तरह के विचार आते है,