अजनबी - 3

(93)
  • 1.7k
  • 783

अपने जैसी परछाइयों को सामने देखकर…दोनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई…वो दोनों परछाइयां…धीरे-धीरे हंसना बंद कर चुकी थीं…अब वो सिर्फ…उन्हें घूर रही थीं…बिल्कुल वैसी ही आंखों से… जैसी उनकी खुद की थीं…रिद्धि की आवाज़ कांप गई और बोली—अ… अपर्णा… ये… ये क्या है…?लेकिन जवाब देने से पहले ही उन परछाइयों ने एक साथ सिर टेढ़ा किया…जैसे…किसी चीज़ को समझने की कोशिश कर रही हों…रिद्धि का डर अब चीख में बदल गया और बोली—अपर्णा भाग! ये छलावा है!अपर्णा ने बिना एक सेकंड गवाए उसका हाथ कसकर पकड़ लिया और बोली—भागो!!दोनों पूरी ताकत से भागने लगीं…पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत नहीं