ममता ...एक अनुभूति... - 2

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जैसे ही वे लोग मुड़ने लगे, तभी बच्चे की हल्की-सी रोने की आवाज़ डिब्बे में गूँज गई।लड़की घबराकर तुरंत बच्चे को अपने सीने से और कसकर चिपकाने लगी, उसकी साँसें तेज़ हो गईं।एक आदमी आगे बढ़ा।उसकी आँखों में शक चमक रहा था।उसने लाठी उठाई और लड़की के चेहरे पर ढका कपड़ा हटाने के लिए हाथ बढ़ाया।लेकिन इससे पहले कि उसका हाथ उसके चेहरे तक पहुँचता—केशव ने झट से डंडा पकड़ लिया।उसकी आँखों में गुस्से की ज्वाला थी।“तेरी हिम्मत कैसे हुई? ये मेरी मेहरारू है… दिखता नहीं, बच्चे को दूध पिला रही है?”डिब्बे में सन्नाटा छा गया।वो आदमी एक पल को