सियोल की सर्द रातें कभी सोती नहीं, लेकिन ताएह्युंग के लिए आज की रात कुछ ज़्यादा ही बोझिल थी। 'गंगनम' के एक आलीशान, आधुनिक अपार्टमेंट की खिड़की के पास खड़ा होकर वह बाहर गिरती बर्फ को देख रहा था। कांच पर जमी भाप में उसे अपना अक्स धुंधला दिखाई दे रहा था। बाहर नियॉन लाइट्स चमक रही थीं, गाड़ियाँ दौड़ रही थीं, एक शोर था जो थमता नहीं था। लेकिन ताएह्युंग के कानों में इस वक्त सियोल का शोर नहीं, कोचांग का सन्नाटा गूँज रहा था।वह याद कर रहा था अपना वो गाँव, जहाँ सर्द रास्तों पर वह नंगे पैर