स्नेहिल नमस्कार प्रिय मित्रों मधुशाला...??? ============ वैसे तो हम अब उम्र की जिस कगार पर खड़े हैं ,यह मस्तिष्क में आना स्वाभाविक सी बात है कि हमारे मन में बहुत सी बातें ,बहुत से विचार, अपनी उम्र से जुड़े न जाने कितने किस्से याद आते रहते हैं बेशक हम स्वयं को कितना भी व्यस्त क्यों न कर लें,रोजमर्रा की बातों से, घटनाओं से मन में पुरानी बातें, स्मृतियाँ न जाने मन के किस कोने में से उठकर सामने प्रश्नचिन्ह बनाकर खड़ी हो जाती हैं । कहाँ होते हैं हमारे पास उनके सटीक उत्तर... ---हम तो बस ऐसे ही