लोह पर मक्की की मोटी-मोटी रोटियां थापती वीरों के दिमाग में विचारों के अंधड़ चल रहे थे। नीचे से लोह को तपाता हुआ आग के बवंडर का सेंक उसके गालों को लाल करने की अपेक्षा कत्थई कर रहा था जो उसकी आबनूसी रंगत से भिड़ गया था। महंतों के डेरे पर जितने कामे( काम करने वाले) घर और खेतों में काम करते हैं, उसके पति समेत- उन सब की दोपहर की रोटी का काम उसके हाथों में चूड़े के साथ ही बंध गया था। वीरो की सास भी उनके घर में यही काम करती थी। नई ब्याही को