खोया हुआ विश्वास कमल चोपड़ाबंटी को खाली हाथ घर लौटा देखकर माँ ने हैरानी से पूछा— "नमक की थैली कहाँ है? मैंने तुझे दस रुपए देकर नमक की थैली लेने भेजा था ना?"जवाब में बंटी ने सुबकते हुए कहा- 'किराने वाले की दुकान पर पहुँचकर मैंने जेब में हाथ डाला तो दस रुपये का सिक्का..... लगता है रास्ते में कहीं गिर गया है... मेरी जेब भी फटी हुई है।'माँ ने सुनते ही अपने आटे वाले हाथों से अपना ही माथा पकड़ लिया। बंटी की मासूमियत पर वह विश्वास करने को तैयार नहीं थी। वह उसे झिंझोड़ती हुई उसकी तलाशी लेने