️ हिंदी कहानी: अनाम कातिललेखक: विजय शर्मा एरी (लगभग 2000 शब्दों की मौलिक रचना) ---प्रस्तावनाशहर की भीड़ में अक्सर कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो भीड़ का हिस्सा होते हुए भी अलग दिखाई देते हैं। वे न तो किसी धर्म के झंडे तले खड़े होते हैं, न ही किसी आस्था की परछाई में। वे बस जीते हैं—अपने तर्क, अपने सवाल और अपने अकेलेपन के साथ। यह कहानी ऐसे ही एक व्यक्ति की है, जो खुद को नास्तिक कहता था, पर उसकी ज़िंदगी धीरे-धीरे उसे एक ऐसे मोड़ पर ले आई जहाँ वह "अनाम कातिल" बन गया। ---पहला अध्याय: सवालों का आदमीअरविंद बचपन से