गिरगिट को रंग बदलते हुए तो हम सभी ने कभी न कभी देखा है।वह अपनी सुरक्षा के लिए, परिस्थितियों के अनुसार अपना रंग बदलता है। यह उसकी प्रकृति है, उसका अस्तित्व बचाने का तरीका है। लेकिन क्या आपने कभी इंसानों को रंग बदलते देखा है?शायद देखा नहीं, पर महसूस ज़रूर किया होगा—अपने ही लोगों में, अपने ही रिश्तों में, अपने ही करीबियों के व्यवहार में। इंसान का रंग उसके चेहरे से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, शब्दों और समय के साथ बदलते रवैये से पहचाना जाता है।जब तक स्वार्थ जुड़ा होता है, तब तक अपनापन भी गहरा लगता है। बातें मीठी