मंजिले - भाग 44

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                    (1) ( ये सत्य कहानी पर आधारत अपराध बोध की कहानी है... नाम कल्पनिक है।)        " तोता राम झूठ बोले " ये बनवारी ने कहा था। बनारस से पानीपत आ चूका मंदिर मे दस साल बाद। पहले कया था, ये तो उसका अतीत ही बता सकता है, या बनारस की वो गलियों और खुली हवेलीयों के पिछवाड़े... वक़्त उस अतीत का ज़ब वो कही भी किसी की जेब काट काट कर कुछ बना भी तो पंडित उपाराम का शगिर्द... उपराम था एक नबर का कंजूस... चाये भी