धीरे धीरे ऐसे ही चार साल बीत गए। इन चार सालों में राजन और त्रिशा के जीवन में बहुत कुछ बदला। जैसे त्रिशा अब अपनी बेटी के लिए जीने मारने लगी थी और राजन की आदत दिन पर दिन उसका जीवन दुखमय बना रही थी। इन्हीं चार साल में गुनगुन की पढ़ाई शुरु होने से पहले राजन ने थोड़े बहुत पैसे जोड़ कर अपनी फैमली के लिए एक छोटा सा घर ले लिया क्योंकि वह जानता था कि आगे उसके सामने बहुत सा खर्चा आने वाला है और वह अपने परिवार का एकलौता कमाने वाला है। इसलिए अपनी परिवार के भविष्य