अनकही - 4

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ट्रेन से उतरते ही मेहरीश को वही शोर, वही भीड़, वही ज़िंदगी का प्रेशर महसूस हुआ। तीन दिन की ख़ामोशी के बाद यह शहर की आवाज़ें उसके कानों में चिल्लाने लगी थीं। हॉर्न, लोगों के झगड़े, मोबाइल की घंटियाँ, सब कुछ बहुत ज़्यादा लग रहा था।उसका फोन ऑन करते ही 12 मिस्ड कॉल्स और 25 मैसेजेस आए। चाची, ऑफिस, बैंक, डॉक्टर। रियल वर्ल्ड ने उसे याद दिला दिया कि उसकी ज़िंदगी साइलेंस के लिए नहीं बनी है।घर पहुँची तो चाची बैठी थीं। "कहाँ थी तू? किसी को बताया नहीं! हम सब परेशान थे!"मेहरीश ने सिर्फ सिर झुकाया। उसकी ज़ुबान फिर