सुबह 7:00 बजे, मेडिटेशन हॉलमेहरीश सक्सेना आँख खोलते ही पहली बात यह सोची कि कल रात वह कितनी गहरी नींद में सोई थी। उस पत्थर के स्पर्श ने, रयान मल्होत्रा की चुप्पी ने, उसे एक अजीब सी शांति दी थी। वह उठी और अपने बैग से वह सफेद पत्थर निकाला। चिकना, ठंडा, सुंदर। उसने उसे मुट्ठी में भींच लिया, जैसे वह कोई ताकत का स्रोत हो।डाइनिंग हॉल में नाश्ते का समय था। मेहरीश ने देखा कि रयान पहले से ही एक टेबल पर बैठा था। अकेला। वह ध्यान से अपनी प्लेट में देख रहा था, जैसे उसमें कोई जवाब छिपे